Wednesday, November 30, 2016

बेपता लिफ़ाफ़ा

बेपरवाह, बेठिकाना , आवारा
हवा में उड़ रहा है
एक बेपता लिफ़ाफ़ा।
यूँ तो खुद का पता नहीं
पर सारी गलियां सारे मोहल्ले
सारे शहर इसीके हैं।
होने को ये सबका है
जो न  हो, तो किसी का नहीं
किसी पते की जरुरत क्या है
बे-पतों  का तो  पूरा आसमां  है
क्यों बाँध दें शख्सियत इसकी
दो चार लाइनों के दायरे में
इस पल ये मैं हूँ
तू हो जाएगा अगले पल में
हवा के साथ उड़ता रहे  दर-बदर
क्यूंकि बहते रहना ही
असल मायनों में ज़िन्दगी है।

Thursday, October 27, 2016

वज़ूद

कोई रंग नहीं है मेरा
न ही कोई रंग होता है किसी का,
कोई आकार नहीं है मेरा
ना ही कोई पहचान होती है किसी की ,
कोई पता भी  नही है मेरा
ना ही ठिकाना होता है किसी का,

ये रंग, ये रूप,
ये आकार, ये पहचान,
ये पते, ये ठिकाने,
ये अच्छा, ये बुरा,
सब के सब वहम
तुम्हारी आँखों में हैं।

और मैं ?
मैं तो बस पानी हूँ...
बिलकुल तुम्हारी तरह।

जब तक की आँखों ने
एक ख़ास रंग घोल
वज़ूद ना बना दिया।

Monday, October 10, 2016

गुज़रा वक़्त

मुड़ के देखो तो लगता है
सब ठीक ठाक था 
ऐसा नही है की मुकम्मल था 
पर सब ठीक ठाक था 

संघर्षों के निशान यादों से 
धीरे धीरे मिट जाते हैं 
उजालों में ये साये भला फिर 
कहाँ टिक पाते हैं 

ज़िन्दगी के वो तीखे कोने 
वक़्त के साथ घिस से जाते हैं 
और फिर मुड़ के देखो तो लगता है 
सब ठीक ठाक था 
मानो सब कितना आसान था 

यही कहानी आज है 
यही कहानी कल होगी 
जो आज कठिन लग रही है 
कल वो ज़िन्दगी नहीं मुश्किल होगी।

Tuesday, September 27, 2016

मेरे नाम

रहो जो बेक़रार मेरे बिन
मुझे दिल का करार लिखना

रहे राहों पे निगाहें जब तलक
आँखों का इंतज़ार लिखना

भूल जाओ जो काम काज मेरी याद में
दिल-ओ-दिमाग का इतवार लिखना

बेनींद गुजरी हैं जो राते ख्वाबो में
निगाहों का वही मौसम दुश्वार लिखना

मिलूंगा न जब इस ज़माने में
अपने दिल पे जाना मेरा इश्तेहार लिखना



Wednesday, September 21, 2016

जमाने भर की सलाह
को स्वीकार करना
मगर बदस्तूर वही
व्यवहार रखना

हर किसी को कुछ न कुछ
कमी दिखती है मुझमे
बड़ा मुश्किल है खुद में
खुद को बरकरार रखना 
दरिया का दरिया
एक घूँट में पी गए
जो ज़िन्दगी एक कहानी
समझ के जी गए

एक लंबा सा
रास्ता ही तो है
काफ़िर भी गए
रामनामी भी गए 

प्रश्न

कहा तुमने
जो सत्य है
उसका पालन करो

जो धर्म है
उसको धारण करो

जीवा सत्कर्मों पर
अर्पण करो

परंतु सब कुछ
जीवन /मृत्यु
धर्म /अधर्म
सत्य/असत्य
जैसा स्पष्ट तो नहीं

अक्सर मोड़ ऐसे आते हैं
जो दिशाओं के बीच से जाते हैं

वहां क्या परिभाषा हो
इन मूल्यों की ??

अँधेरा उजाला घुल जाए अगर
किस रंग रंगे ये मन ??