Monday, May 7, 2012

जाने मैं चला किधर

कुछ  ख्वाब  देखे थे मैंने 
कुछ  सपने  संजोये थे 
उन सपनों में ही हँसते  थे 
उन में ही हम  रोये थे 
छोड़ ख्वाबों को तकिये पर 
आज जाने मैं चला किधर 

सोंच  रखा था  ज़िन्दगी को 
कुछ  इस  तरह  सजाना  है 
रात  में  भी दिन  हो जहाँ 
वहीँ बस  अपना  आशियाना  है 
उन उजालों से बचा नजर 
आज जाने मैं चला किधर

बाँध रखा  था खुद को 
ख्वाबों के कंटीले  तारों से 
चाहता था ज़माने  से अलग 
अलग  दिखूं हजारों से 
अब  बेफिक्र  हूँ फिक्र  छोड़कर 
 जाने मैं चला किधर

राह  और  मंजिल  से बेखबर 
आज जाने मैं चला किधर

Monday, April 23, 2012

मुखौटा

यूँ चेहरे पे चेहरा लगाया है 
की खुद को सभी से छुपाया है 
जमाना कुचल देता एक मासूम को 
मुखौटे ने ही इसको बचाया है !!!.......

Friday, March 2, 2012

हर घड़ी ! हर लम्हा !

तुम्हारे साथ बिताये थे जो पल
यूँ तो बीत गए
पर गुजरते गुजरते  कहीं
मुझे अन्दर तक रीत गए

जाना तुम्हारा छोड़कर ऐसे
जबकि तुम्हारे बिन मैं रहा नहीं
ये एक नया दौर है वक्त का
तो चलो यूँ ही सही    

सोचकर तुम जो चले जाओगे
लगा की आँखे भर आएँगी
जीता था साथ तुम्हारे
तुम बिन धड़कने थम जाएँगी

पर जब तुम यहाँ नहीं हो
जाने क्यों कमी ये नहीं खलती
वक़्त थमा कुछ देर तक पर
जिन्दगी वैसे ही चल दी

शायद अपना रिश्ता ही ऐसा है
की अब मैं नहीं हूँ तनहा
दूर हो तुम पर पास हो मेरे
हर घड़ी ! हर लम्हा !
 

बिन कहे

लफ्ज़ नाकाफी हैं कहने को
न मैं कुछ कहता हूँ
न तुम कुछ कहते हो
फिर भी क्या बात है देखो
तुम भी समझ गए
हम भी समझ गए  

Sunday, January 8, 2012

धारणा

मैं न ही  जानता हूँ
न ही पहचानता हूँ
पर मैंने ये जाने क्यों मान लिया
तुम वो ही हो जो मैं सोचता  हूँ

तुम को जाने बिना
एक ख्याल गढ़ लिया
और मानता हूँ  की
तुम वैसे हो जैसा मैं समझता हूँ

कितना गलत था मेरा ये सोचना
यूँ आवरण को देख भीतर को परखना
फिर बेवजह की एक धारणा बनाना
तुम वही हो जो मैं सोचता हूँ

Thursday, December 29, 2011

जिंदगी के मजे नादानियों में हैं

जिंदगी के मजे नादानियों में हैं
धमा चौकड़ी , खेल खिलौने 
और नानी की कहानियों में है 

हूँ मैं मैं गंभीर और जिम्मेदार भी 
सजग भी हूँ और तैयार भी 
पर मन तो शैतानियों में है
जिंदगी के मजे नादानियों में हैं 

जानता हूँ मैं वक्त की अहमियत को 
मानता हूँ पाबंदियों को 
पर दिल तो लापरवाहियों में है
जिंदगी के मजे नादानियों में हैं 

ना करू गर नादानियाँ तो
जिंदगी के मायने क्या हैं
हर पल को जीना है मुझे
अगले पल न जाने क्या है 

Wednesday, December 7, 2011

आगे निकल आया हूँ मैं

दिल को अज़ीज़ थे जो सपने
तोड़ आया हूँ  मैं
अपनी यादों को पीछे कही
छोड़ आया हूँ मैं
एक वक्त था की तू ही थी
 मंजिल मेरी .......
 ......................
अब अपनी राहें
मोड़ आया हूँ मैं