Tuesday, February 12, 2013

मेरी ज़िन्दगी के लम्हों को कम कर रही है,
दीवार पे टंगी घड़ी टिक-टिक चल रही है। 

Tuesday, February 5, 2013

ज़ज्बा

हर कदम पर होगी आजमाइश  मेरी 
पर धार मे बह जाना मेरा मुकद्दर  नही,
मुमकिन है लहरें डुबा  दे मुझको 
मगर जज्बे को मेरे डूबा दे वो समंदर नहीं .

Monday, January 28, 2013

तो चले आना

तुम तक जो पहुँच जाये मेरी आवाज
तो चले आना ,
सदायें मेरी छेड़ दे तेरे दिल का साज़
तो चले आना ,

दिल धड़कता है तेरे इंतज़ार में आज भी
खुल जाए तेरे आगे मेरा  ये राज़
 तो चले आना ,

बेतकल्लुफ थी हर मुलाकात अपनी
महसूस हो वही बेबाक अंदाज़
तो चले आना,

सिसक उठती है रग -रग तेरी याद में
तुझ पर भी गिरे मेरी यादों की गाज़
तो चले आना,

दर्द का तराना है ये गीत मेरा
तेरे होठों पे भी जो आ जाएँ मेरे अलफ़ाज़
तो चले आना।

Tuesday, January 22, 2013

एक बार फिर ....

तुझसे कुछ बातें करना चाहता हूँ
कभी तुझसे मिलना चाहता हूँ
मगर फिर यूँ ही सोंचता हूँ
"टूटे शीशों को जोड़ने से
तस्वीर न बदलेगी ,
मैं बदनसीब हूँ
मेरी तकदीर न बदलेगी ,
थोडा सा जो बाकी है कहीं
वो पूरा टूट न जाए ,
हाथों में जो बाकी छोटी सी
वो डोर छूट न जाये ,
कहीं ऐसा न हो जो रह गया बाकी
वो एहसास भी मिट जाए ......."

यही सोंचकर बढ़ते कदम
रुक से जाते हैं .......

भटक जाता हूँ हर मोड़ पर 
अजनबी सी हैं ये गलियाँ 
इक तो लीक नयी मेरी 
उसपर अन्जान  शहर तेरा 


Sunday, November 4, 2012

स्वप्न मुझको बोने दो

अभी सपने में हूँ मुझे सोने दो 
अधूरे से मेरे सपने को पूरा होने दो 
जागूँगा फिर मैं इक नए स्वप्न में 
अभी स्वप्न मुझको बोने दो !!

स्वप्न और हकीकत

सपनों से भरी सपनीली दुनिया में
सपने ही मैं देखा करता हूँ ,
सपनों में यूँ गुम हो जाता हूँ
खुद से ही बातें करता हूँ

बिखरे -बिखरे  भूले -बिसरे
ख्वाबों को यूं मैं बिनता हूँ
इन ख्वाबों  के किसी एक कोने में
हाँ इस पल मैं जिंदा हूँ

जोड़ सके जो सपनो को हकीकत से
ऐसी कोई डोर है क्या ,
ख्वाबों की अछोह गहरायी में
हकीकत  के धागे खोजा करता हूँ


सपनों से भरी सपनीली दुनिया में
सपने ही मैं देखा करता हूँ ,
सपनों में यूँ गुम हो जाता हूँ
खुद से ही बातें करता हूँ


इन अधपके अधूरे  ख्वाबों को
अपनी असलियत कैसे बनाऊं
थोडा और जगना है इस स्वप्न में
तो आओ फिर सो जाऊं
तो आओ फिर सो जाऊं .....