Tuesday, May 14, 2013

शाम की दास्तां



दिन तो फिर दिन है
रात की अपनी बात है
इन दोनों के जो दरमयान
दिलकश सी एक शाम है

ना धूप सी ये जलती है
ना अँधेरे सी खलती है
मद्धम मद्धम आंच है
दिये सी ये जलती है

दिल में कुछ सुकूं -सुकूं
सा हो जाये
शहद सा आँखों में घुलती है
हर रोज शाम मुझे यूँ ही मिलती है

और आज भी .....

शाम गहरा रही है
हर मंजर है धूमिल- धूमिल
लाल- लाल आँखें सूरज की
नींद से बोझिल- बोझिल .........


Monday, May 13, 2013

यादें जो छूटती नहीं

दुपहरिया की धूप हो 
या आधी रात का अँधेरा 
बिना किसी शर्त के 
तुम लोगो ने साथ दिया है मेरा,

चार साल साथ में मिलकर
हमने खूब बकवास की
याद है मुझको रात रात भर खेली
सारी बाज़ी ताश की ,

' गेम ' ने सबका गेम बजाया
' आधा ' ने पूरा साथ निभाया
' चिकना ' अपनी चिकनाहट में मस्त
' मोटा ' भाई के आगे सारे पस्त,

' बंगाली' कभी नहाये ना
' छोटू ' को चैन कभी आये ना
' क्रन्तिकारी ' ख्यालों में खोया रहे
' बुढवा ' दिन भर सोया रहे,

एक था अपना ' राजकुमार '
नेपाल से वो आया था,
' गोलू ' अपना मस्त था लेकिन
कांग्रेस से खार वो खाया था ,

वो हम लोग कुछ और थे
वो समय कुछ और था
गज़ब वो अपना बेफिक्री
का दौर था .........

जो यादों की बेशकीमती डायरी
मेरे पास छोड़ गए हो
रोज उसमे से एक पन्ना
पढता हूँ ..... , हँसता हूँ ......
आँखें भीग जाती हैं ....
और मैं बस खो जाता हूँ ........ 

Friday, March 8, 2013

मैं कौन

इक दिन अपने ही अक्स से 
आईने के उस शख्स से
सवाल किया जो मैंने
जवाब मिला बस मौन ....
मैं कौन ?....मैं कौन ?.. मैं कौन ?...


अधूरे ख्वाबों के इक कोने में
मेरे हर इक होने - ना होने में
हर पल-छिन कुछ पाने कुछ खोने में
सवाल वही ,जवाब फिर मौन .....
मैं कौन ?....मैं कौन ?.. मैं कौन ?...

अँधेरी उन्जयारी राहों में
धूप छाव की बाहों में
थकते दुखते पाँव के छालो में
सवाल वही ,जवाब फिर मौन .....
मैं कौन ?....मैं कौन ?.. मैं कौन ?...

रगों में उबलते खून में
सीने में उठते जूनून में
पल-पल बदलती धड़कन की ताल में ,
सवाल वही ,जवाब फिर मौन .....
मैं कौन ?....मैं कौन ?.. मैं कौन ?...

अंतर्मन की परतों में
अँधेरी इन गर्तों में
खुरच-खुरच निकले उजालों में
सवाल वही ,जवाब फिर मौन .....
मैं कौन ?....मैं कौन ?.. मैं कौन ?...

अधूरे ख्वाब

जो कुछ अधूरे ख्वाब हैं मेरे
वो ही तो मेरे मीत हैं ,
मन का उत्साह वही हैं
वही जीवन का गीत हैं .

जो ख्वाब अधूरे मेरे,
मुझको समझाते हैं
आगे और रास्ता है बाकी
चलो और कुछ दूर तक जाते हैं

जो कुछ अधूरे ख्वाब हैं मेरे
मुझको यूँ आबाद करते हैं
मेरी निगाहों के दायरे से
मुझे आज़ाद करते हैं

जो कुछ अधूरे ख्वाब हैं मेरे
साथ मेरे चलते जाते हैं
देकर इक टीस सी मन में
अधूरे होने का एहसास दिलाते हैं

जो कुछ अधूरे ख्वाब हैं मेरे
कहते हैं रुकना नहीं है तुझे
की अभी हम पूरे नहीं हुए
यही ख्वाब मुझे पूरा करते हैं
क्या हुआ जो ये खुद अधूरे हुए .

ऐ खुदा कुछ ख्वाब
अधूरे ही रहने दो
पूरे जो हुए तो ये मर जायेंगे
मेरी आँखों को तनहा कर जायेंगे .

Thursday, March 7, 2013

यूँ शामिल गुनहगारों में मेरा नाम हो गया
कि बेगुनाही मेरी मेरा इलज़ाम हो गया ,
जिस बात का मेरी कायल था जमाना सारा
आज नामुमकिन वही एक काम हो गया .

Tuesday, February 12, 2013

मेरी ज़िन्दगी के लम्हों को कम कर रही है,
दीवार पे टंगी घड़ी टिक-टिक चल रही है। 

Tuesday, February 5, 2013

ज़ज्बा

हर कदम पर होगी आजमाइश  मेरी 
पर धार मे बह जाना मेरा मुकद्दर  नही,
मुमकिन है लहरें डुबा  दे मुझको 
मगर जज्बे को मेरे डूबा दे वो समंदर नहीं .